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मुख पृष्ठ - अनहद की कलम से

समर्पित कर्म

दिन उठा और साथ में मुझको उठाया,मगर मैंने कह दिया-कुछ देर मैं,बिस्तर पे ही लेटा रहूँगा-रात भर नींदें मुझे आती नहीं हैं।तुम तो होते ही ज़रा सी रात, सोनेबिस्तरों पर …

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एक और पूर्णिमा चली गई- भाग २

प्रेम-पात्र की आध्यात्मिक यात्रा- गुरु-मिलन २५ फरवरी २०२४ खंड 1: काल की लय समय और काल का चक्र – “जीवन की निरंतर गति” एक और पूर्णिमा चली गई।पड़वा बीती, द्वितिया, …

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एक और पूर्णिमा चली गई- भाग १

विहराग्नि और आध्यात्मिक मिलन की तड़प १९ जून २०१९ खंड-१: काल की लय समय और काल का चक्र – “जीवन की निरंतर गति” एक और पूर्णिमा चली गई!पड़वा बीती, द्वितीया, …

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दौड़ थमने–सी लगी है

दौड़ थमने–सी लगी है,खोज बढ़ने–सी लगी है,रौनकें बाज़ार पहुंची आसमाँ–पर चाह घटने–सी लगी है।जिनकी ख्वाहिश थी,कभी सपने बुने थे,जिनको पाने को,अजब रस्ते चुने थे।रास्ते वो दौड़ के,हाथ कितने छोड़ के,छू …

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