शब्दों के प्रपंच और
तर्को की निरर्थकता-
उम्र लगती है समझने को!
प्यार अनुभव है व्याकरण नहीं-
जिसके बँधे नियम हो।
विस्तृत आकाश में
बिखरे तारों की चमक-
तुम उन्हे गौर कर सकोगी
प्यारे पूनम के चाँद के गिर्द?!
अभी सिर्फ शब्द हैं अनुभव नहीं-
क्योंकि उम्र लगती है,
समझने को-
शब्दों के प्रपंच और
तर्को की निरर्थकता!
०९०३२२/०९०३२२





