देह में चुभते-चुभते,
तुम्हारी आँखो को भी चुभने लगे हैं।
काँटों का भी उद्देष्य होता है कोई...
या निपट निर-उद्देष्य भी हो सकते हैं...
...सिर्फ होने के लिए... !!
०९०३२४/०९०३२४
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