तुम भवन के साथ भँवरे हो जाते हो।
ईंट, गारा, रेत, मिट्टी से बना;
चमकदार और चटकदार
रंगों से लिपटा!
तुम अक्स देख कितने मोहित हो!
तनिक इधर से, तनिक उधर से-
तराशने में कितने मगन,
कि कोई खटखटाता है
भवन के मुख्य द्वार को-
कोई भान ही नहीं!
तुम मृत्यु की
भयपूर्ण प्रतीक्षा करते हो- मृत्यु!
०९०४२४/०९०४२४





