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तुम कहाँ हो? - अनहद की कलम से

तुम कहाँ हो?

तुम कहाँ हो?
बारिश में भीगी मिट्टी की महक
तुम्हारी देहगंध सी क्यों लगती है?
क्या तुम कहीं आस-पास ही हो?

हवा की इस छुअन में क्यों होता है
तुम्हारे स्पर्श का अहसास?
क्यूँ रात के इस सन्नाटे में
सुनाई देती है तुम्हारी कूकती आवाज?

उन घने बादलों के पीछे झाँकती
चमकती किरण-
कहीं तुम्ही तो नहीं..!

०९०५१८/०९०५१८