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कुछ फलसफ़े - अनहद की कलम से

कुछ फलसफ़े

एक- अंतर में प्राण मिला

जीवन के मिथ्यापन में, 
जीवन का राज़ छिपा;
जीवन की दौड़-भाग में,
जीवन विश्राम छिपा!

तुमको जीवन का दर्शन,
जीवन के साथ मिला;
तुमको जीवन का दर्पण,
अंतर में प्राण मिला!

०५०२१०

दो- राह और वक़्त

राह और वक़्त जब हो जाते हैं साथ,
मुकाम दूर हो के भी करीब हो जाते हैं।
वक़्त छोड़ दे जो राह का साथ,
मुकाम मिलते ही मिसाल हो जाते हैं।

२१०२१०

तीन- अनजान डगर

गुज़रूँ जो उस गली से 
उसकी महक बताऊँ;
उसका है क्या ठिकाना,
पहुँचूँ तो जान पाऊँ!

२१०२१०