इस तरफ या उस तरफ
या बीच में चलता चलूूँ,
या बैठ जाऊँ बस यहीं-
- तूफ़ान ले के उड़ चले
या धूप में झुलस पड़े!
सब दिशा अदृष्य है,
ना कोई कोण दिख रहा,
बात किससे मैं कहूँ?!
ये भाव, भ्रम से लिप्त है
या सत्य साध्य सिद्ध है?
इस चक्र में, कुचक्र में,
मैं भाँति-भाँति घूमता,
दया करो, दया करो...!
या कील पर सँवार दो
या चक्र रोक दो यहीं!
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