suhas_giten
WhatsApp Image 2025-07-08 at 21.29.45
previous arrowprevious arrow
next arrownext arrow
चक्रव्यूह - अनहद की कलम से

चक्रव्यूह

अभिमन्यु की तरह
चक्रव्यूह में फँस गया ऐसा लगता है।

किंतु कुछ अंतर है-
अभिमन्यु का चक्रव्यूह तो एक
विशेष चक्रव्यूह था,
और थी उसकी विधि
बाहर आने की भी।
किंतु मुझे तो जीवन
पूर्णतः चक्रव्यूह दीख पड़ता है,
अनंत चक्रव्यूहों को
अपने में समाए हुए!
एक चक्रव्यूह से बाहर निकलना,
सिर्फ दूसरे चक्रव्यूह में
भीतर जाना है।

इन चक्रव्यूहों में हैं सिर्फ
युद्ध, संघर्ष और भय,
इन चक्रव्यूहों में हैं,
सिर्फ अनंत वासनाएँ
और उन्हे पूर्ण करने की
अश्लील होड़!

'मुक्तिदाता' सिर्फ एक शब्द...!
'मुक्ति' सिर्फ एक भ्रम...।
हे प्रभु! इस भय के साम्राज्य में
तुम्हारा प्रेम कहाँ लुका बैठा है-
भयग्रस्त...!

१७०८२९/१७०८२९