suhas_giten
WhatsApp Image 2025-07-08 at 21.29.45
previous arrowprevious arrow
next arrownext arrow
क्यूँ नहीं मुझको छुड़ाते! - अनहद की कलम से

क्यूँ नहीं मुझको छुड़ाते!

क्या हुआ?
कोशिशें तो कर रहा,
किंतु कुछ नाकाम-सा ही लग रहा!
क्या तरीका है गलत?
या कि जल्दी मैं परीक्षण कर रहा?!

भीतरी आँखों से अपनी देखना।
संदेह है,
करने, ना-करने का मुझे।

संदेह रहता-
कुछ कमी मुझसे ही रहती
या कि मुझको
और धीरज धारना है?

संदेह रहता-
कोशिशें मेरी ही तो बाधा नहीं है
या कि
जकड़ा हूँ जो तुझपे छोड़ना है?

हे प्रभु! निरीह मैं तो,
और अज्ञानी घना हूँ!
किंतु तुम तो देख पाते हो वृहद को,
और मेरी बेबसी को भी समझते!
क्यूँ भला फिर भेद कर सारी दीवारें,
तुम नहीं मुझको छुड़ाने आन पाते?!

१८०९१५/१८०९१५