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मृत्यु - अनहद की कलम से

मृत्यु

साँस जाती है और साँस आती है।
यूँ तो ये फासला होता है एक पल का।
मगर कभी ये हो जाता है
एक अंतहीन फ़ासला !

१९११२१/१९११२१