वो रिश्ते- जिनने
जी लिया जो वक़्त अपना;
उन्हें पहचानों, औ’ उनकी उम्र को
स्वीकार कर आगे बढ़ो।
ये जीवन है बड़ा लंबा,
कई किरदार सब खेलें;
कि समझो ये नया रस्ता, उसे
स्वीकार कर आगे बढ़ो।
दोस्त- कभी थामें थे जिनके हाथ,
कदम उनके कहीं बढ़ते,
उन्हें समझो औ' उनकी चाह को
स्वीकार कर आगे बढ़ो।
मोह का जाल कुछ ऐसा,
बिछड़ना घाव कर देता;
उसे जानों औ' उसके प्रेम को,
स्वीकार कर आगे बढ़ो।
नहीं रोको, जो जाता है,
कि जाने का समय आया;
चाल देखो औ' उसके सत्य को
स्वीकार कर आगे बढ़ो।
वो रिश्ते, जिनने
जी लिया जो वक़्त अपना;
उन्हें पहचानों, औ’ उनकी उम्र को
स्वीकार कर आगे बढ़ो।
२००१०४/२००१०४





