नये वर्ष में सब
पावन हुआ जाता है-
तुम, तुम्हारी यादें और
तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा-
सब वर्तमान के इस एक पल में
घुला जाता है।
नये वर्ष में सब
पावन-सा हुआ जाता है।
"फूल, उन कलियों को
कहाँ खो आए?
जो दिखती थीं मेरी प्रेयसी की
बंद आँखों की तरह!”
“वही कली हूँ,
बस तुम्हे देख,
फूल-सा खिला जाता हूँ।
नये वर्ष में मैं भी
पावन-सा हुआ जाता हूँ।”
२३०१०१/२३०१०१





