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आत्मा में रामलला - अनहद की कलम से

आत्मा में रामलला

प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,
मचा बड़ा कोहराम,
भीतर आँखें फेरिए,
मिटें सभी संग्राम।

हृदय हमारे रामलला,
अभी रहे पाषाण,
राम-नाम ना रटन रहे,
बने हृदय के प्राण।

प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,
कर लो भक्त-सुजान,
भीतर की श्री राम से,
जागे हिय के प्राण।

२४०१२२/२४०१२२