दुआएँ ही दवा बनकर,
वजूद-ए-ग़म मिटा देती,
खुदा के दर पे सजदे कर,
बनी-बिगड़ी संवारेगा।
तू उस पर जो भरोसा रख,
तुझे उसका ये वादा है,
जो आँधी हो, रहे तूफ़ाँ,
तुझे हर दम संभालेगा।
तुझे तेरा गुरूर-ए-फ़न,
वो ही हर फ़न का मालिक है,
तेरी खूबी नज़र कर दे,
तुझे हर फ़न नवाज़ेगा।
दुआएं कर, इबादत कर,
तू उसके दर पे सजदा कर,
हरिक ख्वाहिश मुकम्मल हो,
हरिक़ ग़ुरबत मिटा देगा।
तू ख़्वाजा की इबादत कर,
गले लग जा इलाही के,
तिरे भीतर जो बैठा वो;
खुदा, खुद से मिला देगा।
२५०६०९/२५०६०९





