तुम देखते हो
खिड़की से बाहर चमकते चाँद को,
और भर जाते हो आह्लाद से-
उस चमकते चाँद के लिए!
दीवार से निकले उस झरोखे को
कब धन्यवाद दोगे..!
०९०३२२/०३०९२२
तुम देखते हो
खिड़की से बाहर चमकते चाँद को,
और भर जाते हो आह्लाद से-
उस चमकते चाँद के लिए!
दीवार से निकले उस झरोखे को
कब धन्यवाद दोगे..!
०९०३२२/०३०९२२