suhas_giten
WhatsApp Image 2025-07-08 at 21.29.45
एक अजन्मे को पत्र
IMG-20250705-WA0011
IMG-20250705-WA0018
IMG-20250705-WA0015
IMG-20250705-WA0013
previous arrowprevious arrow
next arrownext arrow
आँखमिचौली - अनहद की कलम से

आँखमिचौली

मैं धुंधला-धुंधला देख रहा, 
उस भीनी-भीनी खुशबू को;
हौली-हौली-सी आवाज़ें,
सहला जाती हर रोएँ को!

वो छिप जाती, वो फिर आती,
क्या खेले छिपन-छिपैया वो?
रोते-मुस्काते ढूँढ-ढूँढ,
मचले उसके आलिंगन को।

ये पास रही, अरे कहाँ गई!
पीछे आ धप्पा बोल गई।
हम चौंके-चौंके खड़े रहे,
वो कूँद-फाँद दीवारों से।

ये आँखमिचौली कब तक की?
मायूस बड़ा ये कर डाले।
हाय! टपक-टपक हिय करता है,
गूँगा कर देगी क्या इसको?!

२००१०८/२००१०८