परिस्थितियाँ गोते लगाती हैं-
गहरे समुंदर में,
और फिर उछल कर ऊपर आती हैं।
उड़ जाती हैं फिर ऊँचे आसमान पर…
ऊँचे और ऊँचे ....!!
क्या तुमने कभी आसमान की गहराई
और समुंदर की ऊँचाई को देखा है?
और क्या तुम मानोगे
कि ये ना देख कर
तुमने कितना आधा देखा है?!
चलो देखते है दूसरा आधा भी-
परिस्थितियाँ उड़ जाती हैं,
ऊँचे समुंदर में,
और फिर कूद कर गोते लगाती हैं,
गहरे आसमान में,
गहरे और गहरे...!!
और यदि तुम इसे सिर्फ
शब्दों का खेल समझो,
तो गहरी या ऊँची भूल होगी तुम्हारी!
ये शब्दों का खेल नहीं,
सच है अस्तित्व का!!
०७१०२८/ ०७१०२८





