प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,
मचा बड़ा कोहराम,
भीतर आँखें फेरिए,
मिटें सभी संग्राम।
हृदय हमारे रामलला,
अभी रहे पाषाण,
राम-नाम ना रटन रहे,
बने हृदय के प्राण।
प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,
कर लो भक्त-सुजान,
भीतर की श्री राम से,
जागे हिय के प्राण।
२४०१२२/२४०१२२
प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,
मचा बड़ा कोहराम,
भीतर आँखें फेरिए,
मिटें सभी संग्राम।
हृदय हमारे रामलला,
अभी रहे पाषाण,
राम-नाम ना रटन रहे,
बने हृदय के प्राण।
प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,
कर लो भक्त-सुजान,
भीतर की श्री राम से,
जागे हिय के प्राण।
२४०१२२/२४०१२२