और कितनी देर तक
उन कुछ पलों को
याद करता मैं रहूँगा!
और कितनी देर तक
उन प्यार के मीठे पलों में
इस तरह बहता रहूँगा!
जो भी वो होता रहा था,
क्या तुम्हें कुछ भी पता था?
क्या तुम्हारी देह थोड़ी भी
सशंकित सी हुई थी?!
और वो स्पर्श जो तुमको कभी फिर,
बाद में सिहरा रहे थे,
उस समय क्या
नहीं अनुभव में ही तुमको
गुदगुदाते लग रहे थे?!
और कितनी देर तक
उस मुक्तपल के पंख से
उड़ता रहूँगा!
और कितनी देर तक
उन कुछ पलों को
याद करता मैं रहूँगा!
और कितनी देर तक
उन प्यार के मीठे पलों में
इस तरह बहता रहूँगा!!
०६०४०६/०६०४०६





