कौन जाने किस सदी से!
वक्त के धागे जुड़े हैंकौन जाने किस सदी से;दिख रहा सागर यहाँ,पर मिल रहा किस-किस नदी से।लम्हा लम्हा यूँ सरकता,यूँ सिसकता बढ़ रहा है, कौन मानेगा जुड़े,परमात्मा या उस नबी …
वक्त के धागे जुड़े हैंकौन जाने किस सदी से;दिख रहा सागर यहाँ,पर मिल रहा किस-किस नदी से।लम्हा लम्हा यूँ सरकता,यूँ सिसकता बढ़ रहा है, कौन मानेगा जुड़े,परमात्मा या उस नबी …
ये जानते हुए भी कि ये गलत राह है,मैं बेबस चलता हूँ इस पर,क्योंकि और भी राहें जो दिखती हैं आसपास,वो भी तो सही नहीं जान पड़तीं!और फिर ये इल्म …
प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,मचा बड़ा कोहराम, भीतर आँखें फेरिए,मिटें सभी संग्राम।हृदय हमारे रामलला,अभी रहे पाषाण, राम-नाम ना रटन रहे,बने हृदय के प्राण।प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,कर लो भक्त-सुजान, भीतर की श्री राम से,जागे …
बहुत हो गया ध्यान चलो, कुछ देर होश खो देते हैं,बेसुध-से चलते यारों,कुछ देर तनिक सो लेते हैं।——————कुछ देर नशे में रहने दे,कुछ देर बहकने दे मुझको, कुछ देर शराबी …