SUHAS MISHRA
और दो पहर बीत गए!
दो घंटे की बातचीत में,कितने रंग उभर आए,नीले-पीले, लाल-गुलाबी,श्वेत- श्याम भी घुल आए।रस में डूबी कही, सुनी में,मन-कलिकाएँ खिल आईं,कभी उदासी, कभी खुशी में,आँख की पलकें भर आईं!शुरू किया था …
राग और विराग
ये क्या है, हमसफ़र होनाऔर फिर दूर हो जाना, मिलना और राही से,राह का फिर बदल जाना।लगता यूँ कि जीवन भर,रास्ते एक ही होंगे, मगर मोड़ों पे, रस्तों सेमुड़कर दूर …
धुआँ-धुआँ हर साँस
न जाने ये कैसी बेचैनी है, न जाने क्या सुलगता-सा है-देह के भीतर… हर लम्हा।धुआँ-धुआँ-सा हर साँस से बाहर-और हर साँस और भी सुलगता जाता!बेबस हूँ- बावजूद हर शै के।गहराती …





