शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता!
शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना सकुचाहट, ना गर्माहट, ना पिघला, ना बहता। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना रिश्ते के इस स्वरूप पर, तुझे-मुझे कुछ शिकवा, ना इसको कुछ दृढ़ करने की, तेरी-मेरी …
शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना सकुचाहट, ना गर्माहट, ना पिघला, ना बहता। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना रिश्ते के इस स्वरूप पर, तुझे-मुझे कुछ शिकवा, ना इसको कुछ दृढ़ करने की, तेरी-मेरी …
सब कुछ श्रेष्ठ प्राप्य है मुझको- धन, वैभव, संबंधी!तृप्त-पूर्ण हूँ घर-वाहन से, हर सुविधा सम्पन्न,माँ, भार्या, सुत, भाई-बहन से,तृप्त सभी संबंध। मित्र वर्ग- मैं भाग्यावान हूँ,साथ निवासी सत्जन, कर्मक्षेत्र सहयोगी …
इन तंग-तंग-सी गलियों में, तुम फ़िकर छोड़ दौड़े जाते;ये देह-परिधि जो बढ़ जाती,तुम दौड़-दौड़ भूले जाते।जो दौड़ बहुत आगे बढती,होतीं ये तंग बहुत गलियाँ;तुम आगे बढ़ने की धुन में,इन गलियों …