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एक अजन्मे को पत्र
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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

यारा खूब खिला करते

वही रेत है, वही घड़ी है, वही सरकना चुपके से, बार-बार उल्टा-पुल्टा कर, यार खूब मिला करते।बरसों बाद मिले तुम सबसे, पर जैसे कल का नगमा; जिसे साथ में, सुर …

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तुम हमारे ध्यान से जाती नहीं

पल नहीं, क्षण भर नहीं,कुछ देर किंचित भी नहीं-तुम हमारे ध्यान से जाती नहीं।हम विपश्यना कर रहे, तुम साँस के पथ पर सरकती आ गईं। साँस फिर बाहर औ’ भीतर …

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पावन-सा हुआ जाता है

नये वर्ष में सब पावन हुआ जाता है-तुम, तुम्हारी यादें और तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा-सब वर्तमान के इस एक पल में घुला जाता है।नये वर्ष में सब पावन-सा हुआ …

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अब थोड़ा अमृत-जल भर दो!

सारी गागर रीत चुकी है, अब थोड़ा अमृत-जल भर दो।तुमने मुझको खाली करने ध्यान सिखाया, ध्यान विधी भी सारी अब तो भूल चुकी हैं; आत्मद्वार की चाबी पाने दौड़ रहा …

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