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एक अजन्मे को पत्र
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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

भाव घने हैं- मौन से शब्द तक

भाव घने हैं-पर उनका शब्दों में खिलना, खिल कर छंदों में गुँथ जाना, और छंदों का स्याही से कागज़ पर आना-कुछ मुश्किल-सा क्यूँ लगता है?भाव घने हैं-पर शब्दों की नाव …

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स्वीकार भाव

एक- सब होते जाना है सब होते जाना है।स्वीकार भाव से देखो- क्योंकि सब होते जाना है।तुम्हारे अस्वीकार से होना नहीं बदलता। अस्वीकार से उपजे प्रतिरोध सेतुम बढ़ा लेते हो, …

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चंद दोहे

राई इतनी लीजिये, ना पहाड़ हो जाए;खानें में इतनी रहे, पड़े स्वाद बढ़ जाए। जीरा मुँह में डाल कर, ऊँट की निकली जान,भोजन इतना तो करो, रहेें देह में प्राण। …

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आँखमिचौली

मैं धुंधला-धुंधला देख रहा, उस भीनी-भीनी खुशबू को;हौली-हौली-सी आवाज़ें, सहला जाती हर रोएँ को!वो छिप जाती, वो फिर आती, क्या खेले छिपन-छिपैया वो? रोते-मुस्काते ढूँढ-ढूँढ,मचले उसके आलिंगन को।ये पास रही, …

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