पर हम रीते…
फिर दिन बीता,फिर रात गई,कल सुबह हुईऔर कल बीता।कल का फिर अगला कल बीता।फिर माह गए, फिर बरस गए,फिर दशक-शतों का युग बीता,फिर युग बीते… पर हम रीते। ०५०८१७/०५०८१७
फिर दिन बीता,फिर रात गई,कल सुबह हुईऔर कल बीता।कल का फिर अगला कल बीता।फिर माह गए, फिर बरस गए,फिर दशक-शतों का युग बीता,फिर युग बीते… पर हम रीते। ०५०८१७/०५०८१७
बेटू राजा सो जा,सुन्दर सपनों में खो जा,सपन सलोने आएंगे,लाल परी को लाएंगे।लाल परी जब आएगी,पंखो को फैलाएगी,बेटू राजा को पंखों परबैठा कर उड़ जाएगी।बेटू राजा सो जा….. ०३०४२०/०३०४२० आसमान …
और बातों की छुअन को,दूर से महसूस कर हम,तर-बसर होते रहे!शब्द की हर इक झनक, अनुनाद करती धड़कनों से,कम्पनों से युक्त जिंह्वा लड़खड़ाती;और फिर कुछ शोर यूँ ही गूँजता हृद-धमनियों …