कुछ कतरने प्रेम की
..१..वो अमवा का पेड़ औ’ उस परइक कोयल का कूकना,वो गर्मी की शाम औ’ उसमेंपवन का बेसुध घूमना–ले जाता मेरे चिंतन को,उड़ा के जीवन के उस पल में,जिसे मैं फिर …
..१..वो अमवा का पेड़ औ’ उस परइक कोयल का कूकना,वो गर्मी की शाम औ’ उसमेंपवन का बेसुध घूमना–ले जाता मेरे चिंतन को,उड़ा के जीवन के उस पल में,जिसे मैं फिर …
१२ अप्रेल १९८९”स्वयं अति-थी अपने नाम की तरह।”तूफाँ था वो आया हुआ,याद करता हूँ आज मैं,प्रेम किया था मैंने,जीवन में किसी से।देखा था मैंने तुमको,इक रोज़ जहाँ पर,आता हूँ देख …
ज़िन्दगी अब उबाऊ हो चली है,इस वीरान दिल में किसी के लिये जगहन बच सकी है अभी;कहाँ हम मोहब्बतकिया करते थे कभी,अब यूँ है कि नफ़रत भी नहीं करते!——————–जी नहीं …
“कौन हूँ मैं, क्या है सृष्टि?”प्रश्न उद्वेलित किए थे।”क्या यहाँ मेरा प्रयोजन,यूँ ही या भटके हुए हैं?बेरहम इतना ज़माना,क्या खुदा सच में कहीं है?!””देख भीतर” चाँद बोला,”सत्य के गुलशन खिले …