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एक अजन्मे को पत्र
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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

…शांति ही बस चाहता हूँ

शांत, निस्पृह, मंद…. न कोई हलचल,न ध्वनि कहीं से।न आवेग कोई, न उग्रता का तनिक अंश ही। तूफान का कुछ नाम तक दिखता नहीं…। क्या जल ही सारा तलहटी में …

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प्रेम

“प्रेम, तुम्हारे द्वार ये कोपलें कैसे खिली हैं?क्या सुवासित पुष्पों के इस भ्रूण-रूप कोद्वार कोई और नहीं दीख पड़ता?!””ये अन्तर की कोपलें है-ए राहगीर,दिव्य इनकी महक औरईश इनका स्वरूप है।कोमलता …

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राह से संवाद- २

ये मील के पत्थर कुछ राहत तो देते हैं,मगर ले जाएंगे मुझे मेरी मंज़िल तलक…?-कौन कह पाएगा…!वो आवाज़ जो ख़ामोशी से निकलती है -भीतर से कहींऔर जानती है राज़ मेरी …

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बेबस, मौन विछोह-2

डरा-डरा सा आशंकित-सा चलता था मैं देख, साथ तुम चलती हो ना!आँखे थोड़ी तिरछी करके रहा बराबर देख, साथ तुम चलती हो ना!कई कदम हम साथ चले देखा मैंने तुम …

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