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एक अजन्मे को पत्र
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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

उफ्फ़, लेकिन यह तो सपना था!

मैं छत पर बैठा ऊँघा-सा,उसकी छत कुछ पास हो आई,सखियों संग बतियाता देखा,उफ्फ़, लेकिन यह तो सपना था!नज़र मिलाईं जानबूझकर,देख रही मुझको मुस्काकर,मैं ज़िद्दी मुंह फेर रहा था,उफ्फ़, लेकिन यह …

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क्यूँ व्याकुल हूँ मैं!

प्रेम में तो व्यग्रता होती ही है,जो प्रेम ना है तो भी क्यूँ व्याकुल हूँ मैं?ब्याहने की चाह तुमको है नहीं,हो गईं ओझल तो क्यूँ आकुल हूँ मैं?आज भी मिलने …

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जब देखा तू वापस आई

शोकाकुल तेरे विछोह में,व्याकुल-सा यादों  में;आज खुश हुआ मेरा मन, जब देखा तू वापस आई।खोया था तेरे सपनों में,तेरी ही बातों में,टूट गई तन्द्रा मेरी,जब देखा तू वापस आई।कैसे काटे …

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स्वप्न

दिखे जो आँख बंद होने पर, शरीर के सोने, मन के लेट जाने पर,वही स्वप्न है, एक मृदु असत्य।व्यक्तियों की असमय जमावट, परिवर्तित मूल की बनावट,वही स्वप्न है, एक अकथित कथ्य। उसी स्वप्न …

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