उफ्फ़, लेकिन यह तो सपना था!
मैं छत पर बैठा ऊँघा-सा,उसकी छत कुछ पास हो आई,सखियों संग बतियाता देखा,उफ्फ़, लेकिन यह तो सपना था!नज़र मिलाईं जानबूझकर,देख रही मुझको मुस्काकर,मैं ज़िद्दी मुंह फेर रहा था,उफ्फ़, लेकिन यह …
मैं छत पर बैठा ऊँघा-सा,उसकी छत कुछ पास हो आई,सखियों संग बतियाता देखा,उफ्फ़, लेकिन यह तो सपना था!नज़र मिलाईं जानबूझकर,देख रही मुझको मुस्काकर,मैं ज़िद्दी मुंह फेर रहा था,उफ्फ़, लेकिन यह …
प्रेम में तो व्यग्रता होती ही है,जो प्रेम ना है तो भी क्यूँ व्याकुल हूँ मैं?ब्याहने की चाह तुमको है नहीं,हो गईं ओझल तो क्यूँ आकुल हूँ मैं?आज भी मिलने …
शोकाकुल तेरे विछोह में,व्याकुल-सा यादों में;आज खुश हुआ मेरा मन, जब देखा तू वापस आई।खोया था तेरे सपनों में,तेरी ही बातों में,टूट गई तन्द्रा मेरी,जब देखा तू वापस आई।कैसे काटे …