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एक अजन्मे को पत्र
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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

प्रतीक्षा

उस एक क्षण को कैद कर लूँकि जब तुम्हें पाता हूँ, अपनी आँखो के सामने,कभी चंचल, उच्छृंखल, कूदती-उछलतीं तुम,स्वयं में लीन अंत तक… अहा! क्या खुशी!कभी गंभीर, व्यस्त सोचों में,परिपक्व, …

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मैत्री-भाव संवाद

मेरे भावों की बस्ती में,आज बड़ा इक शोर हुआ;’आँसू’ जो दिखते ही ना थे,नृत्य बड़ा घनघोर हुआ;’विदा’ भाव जो छोड़ चुके थेबस्ती का कोना कोना;आज दिखें वो हर गलियारे,और उन्ही …

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ज्ञात नहीं कब कौन घड़ी

नहीं द्वार पर थाप पड़ी,आई नहीं पदचाप कहीं;हौले से दिल में आ बैठा,ज्ञात नहीं कब कौन घड़ी।मित्रवृत्त से तुष्ट हुआ,नहीं कोई था कष्ट हुआ;नहीं अधिक मित्रों की चाहत,तब भी दिल …

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एक अजन्मे को पत्र

“इस पत्र को तुम न समझना मात्र इसके शब्दों से ही… समझना इसके गूढ़ अर्थ को… !ये न समझ लेना कि जन्म लेना व्यर्थ है…!बल्कि जन्मने के पहले,ओ इस धरती …

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