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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

मित्र-वियोग

अमवा के वृक्ष पर अमिया जब आ गईं,रमवा के बाग में हरियाली छा गई;देख-देख अमिया प्रसन्न होए जाता था,रमवा खुशी से घर, सर पर उठाता था।दिन-दिन तो घंटा में बीते …

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मैत्री

कल तक की मैं बात बताऊँ, मीत एक संग रहता था;वो कहता था, मैं सुनता था, मैं कहता, वो सुनता था।कई बरस तक साथ रहे, यादों में पीछे जाता हूँ;हर …

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मन मंथन

ये व्यग्रता, ये आकुलता, और ये विचारों का सैलाब! मगर इस सैलाब में कहाँ है उस भीगेपन का अहसास, और उस भीगने से मिली तृप्ति।कहीं कुछ और है इस सैलाब …

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कविता

कविता…मात्र एक कवि की स्व–अभिव्यक्ति या उसके पार भी कुछ और? यूँ अनुभव होता है कि एक कवि की अंगुलियों और कंठ से अभिव्यक्त होने के बहुत पहले ही एक …

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