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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

भीड़, बेसुधी और होश की किरण

होश उसने जब संभाला-चल रहा था वो भी सबके साथ-इक रस्ता बड़ा था-वो भी बढ़ता जा रहा था, रास्ते पर।खिलखिलाता, खेलता, रोता कभी लड़ता-झगड़ता, और कुछ पढ़ता-पढ़ाता, रोज़ सोता, रोज़ …

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दोष–निर्दोष का विज्ञान

भाव निर्धारित करेगा,दोष या निर्दोष है!देख कर केवल क्रिया,व्यवहार से मत तोलना,वो तो दोलक कापुराने बल से जैसे डोलना।जैसे लट्टू घूमता हैशक्ति जितनी भी भरी,और फिर आकार;चिकनी हो सतह या …

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द्वैत से अद्वैत की ओर

जो रावण है, वही राम बन जाता है हर काल-ज़रा भीतर निहार कर।एक छोर पर सत्य, चलेअलमस्त झूठ की चाल-ज़रा इक द्वार लाँघ कर।दिन का उजियारा, हो जाता रात, बिना …

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खुदा, खुद से मिला देगा

दुआएँ ही दवा बनकर,वजूद-ए-ग़म मिटा देती,खुदा के दर पे सजदे कर,बनी-बिगड़ी संवारेगा।तू उस पर जो भरोसा रख,तुझे उसका ये वादा है,जो आँधी हो, रहे तूफ़ाँ,तुझे हर दम संभालेगा।तुझे तेरा गुरूर-ए-फ़न,वो …

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