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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

भ्रम की ‘क्यू’

आटा खाने आती मछली,काँटा पीछे, फँस जाती;खुशियों की ख्वाहिश में दुनिया,दुख दरिया में, धँस जाती।ये जो सुख की ‘लाइन’ लगी है,इसकी खिड़की खुली नहीं;ये ‘क्यू’ आगे को मुड़ जाती,दुख-दर्दों की …

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अल्फ़ाज़-ऐ-शुक्रिया

वो साँसें आ रही भीतर,वो साँसें जा रही बाहर;कभी रुक जाए कहीं इक छोर,सोच मैं सहम जाता हूं।परिंदों की खुशी से कूकतीआवाज़ आती है;तेरा सजदा, अरे मौला,कभी क्यों भूल जाता …

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उम्मीद का दामन

शुक्र है कि, शुक्रिया काये अदब बाकी अभी,वरना, मदहोशी में गुम ये,नस्ल क्यों सजदा करे!फिर भी कुछ ईमान ज़िंदाबच रहा बाज़ार में,मेरी जेबों में रखे सिक्केगवाही दे रहे!उन ने लूटा …

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नवीन-यात्रा

नानू, नर्मदा और नवकक्ष-नवीन-सी मित्रता, दो पुरातन से परिचितों की!सब नया-नए परिपक्व, प्रेमपूर्ण नानू,नई निरत माँ नर्मदा,और नए परिवेश में सुसज्जित नया कक्ष…!इस नवीनता में हमने अपने प्रेम और श्रद्धा …

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