नादानी-ए-इश्क़
तुझे नहीं था इल्म ज़रा भी,वो तेरी शैदाई,तूने उसका इश्क गँवाया,तू समझा हरजाई।उसका इठलाना था तुझसे,इतरा कर शरमाई;तुझे लगा वो फ़िदाहर इक पर, तू पागल सौदाई।तेरी तसवीरों को उसने,जिगर छीलकर …
तुझे नहीं था इल्म ज़रा भी,वो तेरी शैदाई,तूने उसका इश्क गँवाया,तू समझा हरजाई।उसका इठलाना था तुझसे,इतरा कर शरमाई;तुझे लगा वो फ़िदाहर इक पर, तू पागल सौदाई।तेरी तसवीरों को उसने,जिगर छीलकर …
उस ऊँचे पहाड़ से गिरतीअविरल जलधारा, ‘झरना’-अपने आगे के रास्ते से पूर्ण अनभिज्ञ,बस छोड़ देता है अपने आप कोकिसी अनजान शक्ति परपूर्ण विश्वास कर!कब तक, कितनी गहराई तक उसे गिरते …
वो सुनती रही मेरी एक-एक कविता,हर एक कविता का एक-एक शब्द।हर एक शब्द का गहनतम अर्थ, वो सुन रही थी अंतरतम गहराईयों से!और उसके मुख से निकले ‘वाह’ के स्वर …
मैं रोया-और बिखरे ढेर-से आँसू,-उस रोने से!उसने समेट लिए वह आँसू,पवित्र मोती-से! वो रोई-और बिखरा ढेर-सा प्रेम-उस रोने से!उसने समेट लिया वह प्रेम,पवित्र धागे-सा!हम मिले-और बन गई एक पवित्र माला,उन …