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एक अजन्मे को पत्र
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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

नादानी-ए-इश्क़

तुझे नहीं था इल्म ज़रा भी,वो तेरी शैदाई,तूने उसका इश्क गँवाया,तू समझा हरजाई।उसका इठलाना था तुझसे,इतरा कर शरमाई;तुझे लगा वो फ़िदाहर इक पर, तू पागल सौदाई।तेरी तसवीरों को उसने,जिगर छीलकर …

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झरना, प्रेम और समंदर- एक अनंत यात्रा

उस ऊँचे पहाड़ से गिरतीअविरल जलधारा, ‘झरना’-अपने आगे के रास्ते से पूर्ण अनभिज्ञ,बस छोड़ देता है अपने आप कोकिसी अनजान शक्ति परपूर्ण विश्वास कर!कब तक, कितनी गहराई तक उसे गिरते …

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काव्य-श्रवण: एक जीवित अनुभव

वो सुनती रही मेरी एक-एक कविता,हर एक कविता का एक-एक शब्द।हर एक शब्द का गहनतम अर्थ, वो सुन रही थी अंतरतम गहराईयों से!और उसके मुख से निकले ‘वाह’ के स्वर …

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प्रेमाश्रु

मैं रोया-और बिखरे ढेर-से आँसू,-उस रोने से!उसने समेट लिए वह आँसू,पवित्र मोती-से! वो रोई-और बिखरा ढेर-सा प्रेम-उस रोने से!उसने समेट लिया वह प्रेम,पवित्र धागे-सा!हम मिले-और बन गई एक पवित्र माला,उन …

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