SUHAS MISHRA
किन राहों को खोज रहे हैं!
लंबे-लंबे रस्ते चलते-कभी घिसटते, कभी उछलते,कभी कहीं बस थम जाते हम।ऐसे ही अनगिनत रास्ते, हमसे होकर निकल गए हैं,हम भी इनकी सिर रीढ़ों पर,मचल-मचल कर फिसल गए हैं।क्या मंज़िल ये …
प्रज्ञा निवेदन
और प्रज्ञा जग उठी और बोलती-“एक प्रतिवासी का घर है,एक घर खुद का यहाँ,एक घर परमात्मा का,बस यही ब्रह्मांड है!””तुमने प्रतिवासी के घर को,खुद का घर समझा हुआ है।”भ्रांति तुमको …
हम तो हैं बंजारे मौला
हम तो हैं बंजारे मौला, हम तो हैं बे-द्वारे मौला, हम तो हैं नदिया की चालें, चल पड़े हरिद्वार मौला।तन्हा-तन्हा घूमते,मस्ती, कभी हम झूमते, सोए रहे अलसाए से,करते हिमालय पार …





