एक वेदना है,
जो व्यक्त होना चाहती है,
पर रह जाती है, अव्यक्त।
कई कारण हो सकते हैं उसके
अव्यक्त रह जाने के-
व्यक्त कर पाने की कला का अभाव,
व्यक्त करने से
संभावित संकट का भय,
संकोच किसी को
परेशान कर देने का,
या फिर व्यक्त करने की
व्यर्थता का पराजित अहसास।
और भी महीन कारण हो सकते हैं
वेदना के व्यक्त ना हो पाने के।
किन्तु क्या इस वेदना को
समझ पाने के लिए,
आवश्यक है इसका
अभिव्यक्त होना?
०९१११५/०९१११५





