ये बातों की टोली है,
अलग-अलग तरह की इसमें बाते हैं।
कुछ रसीली, खटमिट्ठी-
जिन्हें सुनकर, याद आ जाता हो
प्यारा-सा बचपन,
और नम हो जाती हो, हमारी आँखे।
कुछ बेसिर पैर की बातें,
याद करा देती हों,
बिछुड़ी हुई प्यारी सहेलियाँ
और उनकी बेसाख्ता हँसी।
और कुछ प्रेम के उन पलों को,
जिनमें रहते रह जाने का
दिल करता हो-
जीवनभर... हर पल...!
क्या तुम्हारी इन बातों की टोली में,
मेरा भी कहीं ज़िक्र होगा?
मैं अपनी कब्र में मुस्कुरा उठूंगा,
और लुढ़का दूंगा एक आँसू...।
इसी इंतजार में बरसों से रोक रखा है
उस एक आँसू को.......!
०९०२१७/०९०२१७





