ये कैसे तुम हो सकती हो!
नहीं, नहीं उफ्फ़!ये कैसे तुम हो सकती हो!इस अतिमद्धिम जीवदीप में, पुनः नेह से प्राण बसाए,प्राणों का सैलाब बहा,उज्ज्वल-अति उज्ज्वल-तेरा चेहरा भी, दीपक के उजले प्रकाश में।अपने कोमल भावों से …
नहीं, नहीं उफ्फ़!ये कैसे तुम हो सकती हो!इस अतिमद्धिम जीवदीप में, पुनः नेह से प्राण बसाए,प्राणों का सैलाब बहा,उज्ज्वल-अति उज्ज्वल-तेरा चेहरा भी, दीपक के उजले प्रकाश में।अपने कोमल भावों से …
तुमको किनारा कर गई…!ये लहकती, थे मचलती, ‘सरित-सी कल-कलकलाती’,तुम तटस्थत् देखते, तुमको किनारा कर गई!तुम व्योम को ताका करे, के नापते गहराई अपनी,सरित का पर जल तो सूखे!”व्योम कुछ बरसों …