बेबस, मौन विछोह-2
डरा-डरा सा आशंकित-सा चलता था मैं देख, साथ तुम चलती हो ना!आँखे थोड़ी तिरछी करके रहा बराबर देख, साथ तुम चलती हो ना!कई कदम हम साथ चले देखा मैंने तुम …
डरा-डरा सा आशंकित-सा चलता था मैं देख, साथ तुम चलती हो ना!आँखे थोड़ी तिरछी करके रहा बराबर देख, साथ तुम चलती हो ना!कई कदम हम साथ चले देखा मैंने तुम …
कितना मुश्किल साथ में चलना,साथ छोड़ फिर चलना,कितना मुश्किल रुक जाना है, मोड़ साथ में मुड़ना…!उम्र साथ, ना साथ हौसला,ना विश्वास किसी का,कितना मुश्किल मुड़के देखना,मोड़ अजाने मुड़ना…! बहुत आहिस्ता-आहिस्ता …
कभी-कभी जिंदगी में हम अपने दुख में इतने डूब जाते हैं कि उसके सिवा और कुछ नज़र ही नहीं आता…! ना कोई दोस्त, ना हमदर्द… ! कोई मित्र जब अपने …
कल जो नज़र आता था सच, बिलाशक; आज दिखता है झूठ का बेदर्द चेहरा…! और कल…? कल तो तय करेगा वक़्त का हर आता लम्हा…! वहम, भरम के परदे ढाँप …