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मैत्री और प्रेम - अनहद की कलम से

उफ्फ़, लेकिन यह तो सपना था!

मैं छत पर बैठा ऊँघा-सा,उसकी छत कुछ पास हो आई,सखियों संग बतियाता देखा,उफ्फ़, लेकिन यह तो सपना था!नज़र मिलाईं जानबूझकर,देख रही मुझको मुस्काकर,मैं ज़िद्दी मुंह फेर रहा था,उफ्फ़, लेकिन यह …

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क्यूँ व्याकुल हूँ मैं!

प्रेम में तो व्यग्रता होती ही है,जो प्रेम ना है तो भी क्यूँ व्याकुल हूँ मैं?ब्याहने की चाह तुमको है नहीं,हो गईं ओझल तो क्यूँ आकुल हूँ मैं?आज भी मिलने …

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जब देखा तू वापस आई

शोकाकुल तेरे विछोह में,व्याकुल-सा यादों  में;आज खुश हुआ मेरा मन, जब देखा तू वापस आई।खोया था तेरे सपनों में,तेरी ही बातों में,टूट गई तन्द्रा मेरी,जब देखा तू वापस आई।कैसे काटे …

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प्रतीक्षा

उस एक क्षण को कैद कर लूँकि जब तुम्हें पाता हूँ, अपनी आँखो के सामने,कभी चंचल, उच्छृंखल, कूदती-उछलतीं तुम,स्वयं में लीन अंत तक… अहा! क्या खुशी!कभी गंभीर, व्यस्त सोचों में,परिपक्व, …

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