मैत्री-भाव संवाद
मेरे भावों की बस्ती में,आज बड़ा इक शोर हुआ;’आँसू’ जो दिखते ही ना थे,नृत्य बड़ा घनघोर हुआ;’विदा’ भाव जो छोड़ चुके थेबस्ती का कोना कोना;आज दिखें वो हर गलियारे,और उन्ही …
मेरे भावों की बस्ती में,आज बड़ा इक शोर हुआ;’आँसू’ जो दिखते ही ना थे,नृत्य बड़ा घनघोर हुआ;’विदा’ भाव जो छोड़ चुके थेबस्ती का कोना कोना;आज दिखें वो हर गलियारे,और उन्ही …
नहीं द्वार पर थाप पड़ी,आई नहीं पदचाप कहीं;हौले से दिल में आ बैठा,ज्ञात नहीं कब कौन घड़ी।मित्रवृत्त से तुष्ट हुआ,नहीं कोई था कष्ट हुआ;नहीं अधिक मित्रों की चाहत,तब भी दिल …
अमवा के वृक्ष पर अमिया जब आ गईं,रमवा के बाग में हरियाली छा गई;देख-देख अमिया प्रसन्न होए जाता था,रमवा खुशी से घर, सर पर उठाता था।दिन-दिन तो घंटा में बीते …