काव्य-श्रवण: एक जीवित अनुभव
वो सुनती रही मेरी एक-एक कविता,हर एक कविता का एक-एक शब्द।हर एक शब्द का गहनतम अर्थ, वो सुन रही थी अंतरतम गहराईयों से!और उसके मुख से निकले ‘वाह’ के स्वर …
वो सुनती रही मेरी एक-एक कविता,हर एक कविता का एक-एक शब्द।हर एक शब्द का गहनतम अर्थ, वो सुन रही थी अंतरतम गहराईयों से!और उसके मुख से निकले ‘वाह’ के स्वर …
मैं रोया-और बिखरे ढेर-से आँसू,-उस रोने से!उसने समेट लिए वह आँसू,पवित्र मोती-से! वो रोई-और बिखरा ढेर-सा प्रेम-उस रोने से!उसने समेट लिया वह प्रेम,पवित्र धागे-सा!हम मिले-और बन गई एक पवित्र माला,उन …
दो घंटे की बातचीत में,कितने रंग उभर आए,नीले-पीले, लाल-गुलाबी,श्वेत- श्याम भी घुल आए।रस में डूबी कही, सुनी में,मन-कलिकाएँ खिल आईं,कभी उदासी, कभी खुशी में,आँख की पलकें भर आईं!शुरू किया था …