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एक अजन्मे को पत्र
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मैत्री और प्रेम - अनहद की कलम से

काव्य-श्रवण: एक जीवित अनुभव

वो सुनती रही मेरी एक-एक कविता,हर एक कविता का एक-एक शब्द।हर एक शब्द का गहनतम अर्थ, वो सुन रही थी अंतरतम गहराईयों से!और उसके मुख से निकले ‘वाह’ के स्वर …

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प्रेमाश्रु

मैं रोया-और बिखरे ढेर-से आँसू,-उस रोने से!उसने समेट लिए वह आँसू,पवित्र मोती-से! वो रोई-और बिखरा ढेर-सा प्रेम-उस रोने से!उसने समेट लिया वह प्रेम,पवित्र धागे-सा!हम मिले-और बन गई एक पवित्र माला,उन …

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थोड़ा-थोड़ा

थोडा संशय, थोडा निश्चय,थोड़ा-थोड़ा बढ़ना है; थोड़ा धीरज, थोड़ा आतुर;थोड़ा-थोड़ा गढ़ना है।क्या बुनता है समय के भीतर,इससे सब अनजाने हैं;थोड़ा चलना, थोड़ा रुकना,थोड़ा-थोड़ा चढ़ना है।है असीम की कोई परीक्षा,मन का …

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और दो पहर बीत गए!

दो घंटे की बातचीत में,कितने रंग उभर आए,नीले-पीले, लाल-गुलाबी,श्वेत- श्याम भी घुल आए।रस में डूबी कही, सुनी में,मन-कलिकाएँ खिल आईं,कभी उदासी, कभी खुशी में,आँख की पलकें भर आईं!शुरू किया था …

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