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मैत्री और प्रेम - अनहद की कलम से

हम मिल ही गए!

उस पूनम को मैंने तुम्हे चाँद में देखा।मैंने देखा कि तुम एक रातरानी सेफुसफुसाते कुछ कहती हो…।मैं अपने आँगन में पूछता हूँ,इक गुलाब की पंखुड़ी से,”जागती हो, अभी सोई नहीं?”वो …

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तीन प्रेम कविताएँ

एक- तुम बड़ी मीठी हो तुम बड़ी मीठी हो प्रिये!सुबह कमल की पंखुड़ी पर पड़ीओस की बूँद की तरह।रात, छत पर अचानक बह चलीहवा की तरह।और संध्या की तुलसी की …

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चंद शेर

एक तुम्हें याद करने की आदत नहीं है, तुम्हें भूलने का ना कोई सलीका,तुम्हारी नज़र राह पर, रहगुजर से- जुदाई में क्या रस्में-यारी निभाना। दो दिल में दर्द होने का …

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प्रेम और फ़लसफ़ा

एक- प्रेम फूलों ने सुर रागिनी छेड़ी, वीणा ने गंध महकाई,प्रीत में रोशन मन ऐसा, अमावस में चाँदनी भर आई! १७१००९ दो- दिशा, दृष्टि की असंभव है सत्य को पाना, …

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