भाव घने हैं- मौन से शब्द तक
भाव घने हैं-पर उनका शब्दों में खिलना, खिल कर छंदों में गुँथ जाना, और छंदों का स्याही से कागज़ पर आना-कुछ मुश्किल-सा क्यूँ लगता है?भाव घने हैं-पर शब्दों की नाव …
भाव घने हैं-पर उनका शब्दों में खिलना, खिल कर छंदों में गुँथ जाना, और छंदों का स्याही से कागज़ पर आना-कुछ मुश्किल-सा क्यूँ लगता है?भाव घने हैं-पर शब्दों की नाव …
एक- सब होते जाना है सब होते जाना है।स्वीकार भाव से देखो- क्योंकि सब होते जाना है।तुम्हारे अस्वीकार से होना नहीं बदलता। अस्वीकार से उपजे प्रतिरोध सेतुम बढ़ा लेते हो, …
एक- चाँद पूनम के चंदा को देखा।भीतर दौड़ा, पहनी चप्पल, दौड़ के आकर बाहर देखा,चाँद अमावस चला गया! दो- तुम तुमने दिखलाया मुझे चाँद अपनी अंगुली से, फिर पकड़ कर …