तुम याद आए
जब भी मेरे मन के भीतर शब्द बने, अक्षर थिरके-तुम याद आए। कविता कोई रचते-रचते, भावों को कागज पर धरते-तुम याद आए।जब भी कविता ने दूरी की पूरी अपनी,और स्वयं …
जब भी मेरे मन के भीतर शब्द बने, अक्षर थिरके-तुम याद आए। कविता कोई रचते-रचते, भावों को कागज पर धरते-तुम याद आए।जब भी कविता ने दूरी की पूरी अपनी,और स्वयं …
ये इतनी आसां बात नहीं, तुम नदी नहा कर मुक्त हुए; ये इतना सरल नहीं रस्ता, तुम मक्का जा आजाद हुए।खुद को पिघलाना पड़ता है, खुद को मिट जाना पड़ता …
उसको अपना पूरा जीवन, भूल-भुलैया लगता है। जिन राहों पर वो बढ़ता है, जिन मोड़ों पर वो मुड़ता है, अंधे राह-मोड़ वो लगते, कभी खिवैया लगता है।उसको अपना पूरा जीवन, …