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संदेह और धैर्य
कुछ समझ ना पाऊँ प्रभुकहाँ, क्या करता हूँ….क्यूं सोता, क्यूं जगताप्रभु, क्यूँ जीता हूँ?! क्या, मेरा ये करना, ना करना,मुझे तुम्हारे निकट ला रहा है प्रभु?!अवश्य ही ला रहा होगा,किंतु …
तुझे मेरा प्रणाम
हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम, तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार कर ले!भक्त हूँ तेरा मैं पुकारूँ तुझे, तू आकर मुझे अंगीकार कर ले!हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम, तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार …
क्यूँ नहीं मुझको छुड़ाते!
क्या हुआ?कोशिशें तो कर रहा,किंतु कुछ नाकाम-सा ही लग रहा!क्या तरीका है गलत?या कि जल्दी मैं परीक्षण कर रहा?!भीतरी आँखों से अपनी देखना।संदेह है, करने, ना-करने का मुझे।संदेह रहता- कुछ …





