हे प्रभु! शक्ति दो
तुम्हारी प्रीत में अब और मगन होता रहूँ,तुम्हारे गीत में उस प्रेम को गुनता रहूँ !तुम बहते हो देह के हर कण, हर रोम में प्रभु! कुछ यूँ करो कितुम्हारी …
तुम्हारी प्रीत में अब और मगन होता रहूँ,तुम्हारे गीत में उस प्रेम को गुनता रहूँ !तुम बहते हो देह के हर कण, हर रोम में प्रभु! कुछ यूँ करो कितुम्हारी …
कितना धीरज…!बूँद-बूँद घट भर जाता है,पर क्या धीरज रख पाता है?!बीते बरस खेत बुआया, बारिश की सहजी आस,खेत दरारें, खेत हो गए, ना आई बरसात।रूठी खेती, रूठा भाग;रोया मन, असुअन …
इस तरफ या उस तरफया बीच में चलता चलूूँ,या बैठ जाऊँ बस यहीं– तूफ़ान ले के उड़ चले या धूप में झुलस पड़े!सब दिशा अदृष्य है,ना कोई कोण दिख रहा,बात …