विरह के आँसू
मैंने बनाई है अपने आँसुओं से इक माला-उन आँसूओं से जो निकले थे तुम्हारे विरह में।तुम आओ तो पहना दूँ उसे तुम्हारे गले में। तुम उसे उतारना मत,छूने देना उसके …
मैंने बनाई है अपने आँसुओं से इक माला-उन आँसूओं से जो निकले थे तुम्हारे विरह में।तुम आओ तो पहना दूँ उसे तुम्हारे गले में। तुम उसे उतारना मत,छूने देना उसके …
लम्हा लम्हा वक़्त बदलता है,जीवन अर्थों में साकार-ठोस, कभी पिघलता-सा और कभी धुआँ-धुआँ!छू लेने भर से क्या समझा जा सकता है इसके गांभीर्य का वज़न?! सीढ़ियाँ क्या सिर्फ ऊपर जाने …
बारिश की पहली फुहार से भीगीमाटी की, सौंधी खुशबू हो तुम।समुंदर की रेत से मिले सीप कोअनायास पा गए बच्चे की आँख की,मासूम चमक हो तुम।अमिया के बौर से बौराईकोयल …