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मुख पृष्ठ - अनहद की कलम से

विरह के आँसू

मैंने बनाई है अपने आँसुओं से इक माला-उन आँसूओं से जो निकले थे तुम्हारे विरह में।तुम आओ तो पहना दूँ उसे तुम्हारे गले में। तुम उसे उतारना मत,छूने देना उसके …

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अधूरा साथ

सीपियों ने बिताई है तमाम उम्र शंख के साथ,शंख की ध्वनि का उन्हे, अनुमान पर नहीं।लहरों ने कब छोड़ा है समंदर का साथ?उसकी गहराई का उन्हें, अंदाज़ पर नहीं।आईनों ने …

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गांभीर्य और गहराई

लम्हा लम्हा वक़्त बदलता है,जीवन अर्थों में साकार-ठोस, कभी पिघलता-सा और कभी धुआँ-धुआँ!छू लेने भर से क्या समझा जा सकता है इसके गांभीर्य का वज़न?! सीढ़ियाँ क्या सिर्फ ऊपर जाने …

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हर ख़ाब की पहली शर्त हो

बारिश की पहली फुहार से भीगीमाटी की, सौंधी खुशबू हो तुम।समुंदर की रेत से मिले सीप कोअनायास पा गए बच्चे की आँख की,मासूम चमक हो तुम।अमिया के बौर से बौराईकोयल …

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