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अस्तित्व का सच- अद्वैत
परिस्थितियाँ गोते लगाती हैं-गहरे समुंदर में,और फिर उछल कर ऊपर आती हैं।उड़ जाती हैं फिर ऊँचे आसमान पर… ऊँचे और ऊँचे ….!!क्या तुमने कभी आसमान की गहराईऔर समुंदर की ऊँचाई …
पर हम रीते…
फिर दिन बीता,फिर रात गई,कल सुबह हुईऔर कल बीता।कल का फिर अगला कल बीता।फिर माह गए, फिर बरस गए,फिर दशक-शतों का युग बीता,फिर युग बीते… पर हम रीते। ०५०८१७/०५०८१७





