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एक अजन्मे को पत्र
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मुख पृष्ठ - अनहद की कलम से

सृजन

‘सृजन’ तुम जन्मने के पहले ही जन्म ले लेते हो।तुम्हारे साक्षात अस्तित्व में आने के पहले-सृजन की पीड़ा तो कभी पहले ही शुरू हो चुकी होती है!तुम्हारे साक्षात होने कासंभावित …

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अस्तित्व का सच- अद्वैत

परिस्थितियाँ गोते लगाती हैं-गहरे समुंदर में,और फिर उछल कर ऊपर आती हैं।उड़ जाती हैं फिर ऊँचे आसमान पर… ऊँचे और ऊँचे ….!!क्या तुमने कभी आसमान की गहराईऔर समुंदर की ऊँचाई …

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आईना

आईना मुझे ढाढ़स दिलाता है-कि कोई तो है मेरे पास, मेरे साथ, मेरे बहुत करीब, किमैं अकेला नहीं हूँ।तुम कह सकते हो इसे एक भ्रम- एक पागल भ्रमपर मैं पूछता …

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पर हम रीते…

फिर दिन बीता,फिर रात गई,कल सुबह हुईऔर कल बीता।कल का फिर अगला कल बीता।फिर माह गए, फिर बरस गए,फिर दशक-शतों का युग बीता,फिर युग बीते… पर हम रीते। ०५०८१७/०५०८१७