प्रथम-भेंट
और बातों की छुअन को,दूर से महसूस कर हम,तर-बसर होते रहे!शब्द की हर इक झनक, अनुनाद करती धड़कनों से,कम्पनों से युक्त जिंह्वा लड़खड़ाती;और फिर कुछ शोर यूँ ही गूँजता हृद-धमनियों …
और बातों की छुअन को,दूर से महसूस कर हम,तर-बसर होते रहे!शब्द की हर इक झनक, अनुनाद करती धड़कनों से,कम्पनों से युक्त जिंह्वा लड़खड़ाती;और फिर कुछ शोर यूँ ही गूँजता हृद-धमनियों …
संध्या के काले झुरमुट में, रात उतर जब आ जाती है,दिवस उदासा, बड़ा अभागा- आँख अश्रु से भर जाती है।ये अश्रु ही सब तारे हैं।बादल इन मासूम अश्रु के बहने …