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मुख पृष्ठ - अनहद की कलम से

संवेदना

संवेदना को हे कवि! तुम क्षुद्रतम-सा जान बैठे,वेदना की टीस का उपचार हेतु मान बैठे।तू दुखी जब-जब हुआ, धड़क मेरी भी पिराई,अनुभव किया,संवेदना दिखलाई-कभी ना ही दिखाई,रीत भर तुम मान …

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चुनाव

इन्द्र-धनुष के सात रंग-जामुनी भी, पीला भी !तुम्हें पीला पसंद हो सकता हैऔर जामुनी ना-पसंद !अस्तित्व की रचना सतरंगीऔर सुन्दर है,तुम चुनने की भूल में उलझे हो.. । ०९०३२२/०९०३२२

ये कैसे तुम हो सकती हो!

नहीं, नहीं उफ्फ़!ये कैसे तुम हो सकती हो!इस अतिमद्धिम जीवदीप में, पुनः नेह से प्राण बसाए,प्राणों का सैलाब बहा,उज्ज्वल-अति उज्ज्वल-तेरा चेहरा भी, दीपक के उजले प्रकाश में।अपने कोमल भावों से …

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हर वक़्त मैं जवाँ हूँ

था रंग जवानी का औ’ रोशन थी ज़िंदगी,हासिल थी हरिक शै, ना गुलामी ना बंदगी।हर यार कह रहा था, मुकद्दर कमाल है,परवाज़ है फ़लक पे औ’ हासिल है बुलंदी।हर वक़्त …

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